
लखनऊ। फर्जी रजिस्ट्री गैंग के एसटीएफ की गिरफ्त में आने के बाद एलडीए के कई कर्मचारी भी जांच के घेरे में हैं। शुरुआती छानबीन में संलिप्तता सामने आने पर एलडीए वीसी ने इस मामले में आठ कर्मचारियों के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश की है। इस पर शासन ने भी मंजूरी दे दी है। इनमें दो वीआरएस ले चुके हैं तो तीन संपत्ति सेल में लंबे वक्त से तैनात हैं। बाकी के तीन कम्प्यूटर ऑपरेटर पद पर तैनात रहे हैं। विजिलेंस टीम इनके खिलाफ जल्द जांच शुरू कर सकती है।
एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने बताया कि शक के घेरे में आए कर्मचारियों पर फर्जी रजिस्ट्री गैंग को अरसे से खाली पड़े आवंटित प्लॉटों की जानकारी देने का आरोप है। एलडीए वीसी ने बताया कि विजिलेंस जांच के दायरे में आने वाले आठ संदिग्ध कर्मचारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच चल रही है। इनके कार्यकाल के दौरान करवाई गई हर रजिस्ट्री की जांच हो रही है। इनसे जुड़े सभी दस्तावेज विजिलेंस जांच टीम को सौंपे जाएंगे, लेकिन एलडीए अफसरों ने विजिलेंस जांच पूरी होने तक संदिग्ध कर्मचारियों के नाम का खुलासा करने से इनकार कर दिया है।
विजिलेंस टीम एलडीए के संदिग्ध कर्मचारियों के खिलाफ जल्द जांच शुरू कर देगी। इनकी आय से ज्यादा संपत्ति का भी ब्योरा जुटाया जा रहा है। इनमें दो कर्मचारी ऐसे हैं, जो 32 से 34 साल की उम्र में साल 2017 में ही वीआरएस ले चुके हैं। एसटीएफ की गिरफ्त में आए जालसाज एलडीए की कई योजनाओं के प्लॉट फर्जी रजिस्ट्री के जरिए बेच चुके हैं। इस पर एलडीए वीसी ने निबंधन विभाग को पत्र लिखकर संबंधित प्लॉटों की रजिस्ट्री के मूल दस्तावेज की कॉपी मांगी है। इसकी कॉपी जांच के लिए एसटीएफ को सौंपी जाएगी।
फर्जी रजिस्ट्री गैंग के सदस्यों ने एसटीएफ को अपने अन्य साथियों की डिटेल बताई है। पूछताछ में 16 जालसाजों के नाम सामने आए हैं, जो अब भी गिरफ्त से दूर हैं। इनमें कुछ एलडीए के रिटायर्ड कर्मचारी भी हैं। साथ ही इस जालसाजी के तार पूर्वांचल के दो जिलों से जुड़े हैं। एसटीएफ की टीमें इन दोनों जिलों में डेरा डाले हैं।