आंबेडकर जयंती में रामजी नाम के इस्तेमाल पर विचार

लखनऊ। बीजेपी इस बार जोर-शोर से जयंती मनाने की तैयारी कर रही है। आंबेडकर जयंती के कार्यक्रमों में उनका पूरा नाम डॉ.भीमराव ‘रामजी’ आंबेडकर का इस्तेमाल करने का सुझाव गाजियाबाद में हुई आरएएस, भाजपा और अन्य अनुषांगिक संगठनों की बैठक में आया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर भाजपा आंबेडकर को इतनी अहमियत क्यों दे रही है। उनके नाम के साथ ‘रामजी’ शब्द के इस्तेमाल का क्या मकसद है?

दरअसल, भाजपा आंबेडकर के जरिए PDA की काट तलाश रही है। लोकसभा चुनाव 2024 में I.N.D.I.A. ने PDA और संविधान के नाम पर वोट मांगे थे। इससे यूपी में उसे सफलता भी मिली। भाजपा के नेतृत्व वाला NDA 36 सीटों पर सिमट गया था जबकि 2019 में NDA को 62 सीटें मिली थीं। ऐसे में 2027 में दलित वोट बैंक को साधने की तैयारी है। इसी को ध्यान में रखकर भाजपा 2027 में आंबेडकर का सहारा लेना चाहती है।

साथ ही भाजपा का मानना है कि आंबेडकर की उस छवि को भी बदलना जरूरी है, जो विपक्षी दलों ने बनाई है। यही वजह है कि उनके मूल नाम का इस्तेमाल कर उसे राम से भी जोड़ने की कोशिश होगी। नीले रंग का इस्तेमाल बसपा और दलित वोट बैंक पर आधारित अन्य पार्टियां करती हैं। इस छवि को भी बदलने का विचार भाजपा कर रही है।

यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना है। पिछले लोकसभा चुनाव में संघ और भाजपा के बीच आई तल्खी को लगातार दूर करने की भी कोशिश हो रही है। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नरेंद्र मोदी हाल ही में संघ कार्यालय गए थे। वहीं संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक भी हुई थी।

इन दोनों घटनाक्रमों के तुरंत बाद यह समन्वय बैठक हो रही है। ऐसे में माना जा रहा है कि संघ और भाजपा पूरे तालमेल के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर प्रदेश स्तर तक अध्यक्ष के चुनाव के साथ ही विधान सभा चुनाव तक यह तालमेल बना रहे। सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव पर भी बैठक में चर्चा हुई।

यूपी में पहली बैठक पश्चिमी यूपी में ही रखी गई। सूत्रों का कहना है कि हाल ही में गाजियाबाद के ही लोनी के विधायक नंद किशोर गुर्जर का मामला आया था। कहा जा रहा है कि अन्य विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों के मन में भी खटास है। इसको रोकर बेहतर माहौल बनाने पर भी चर्चा हुई। बैठक में संघ, विश्व हिंदू परिषद, विद्या भारती, संस्कार भारती, वनवासी कल्याण आश्रम सहित कई अनुषांगिक संगठनों ने भी अपने अभियानों की जानकारी दी और कहा गया कि इनको गंभीरता से आगे बढ़ाया जाए। सीमापार से अवैध गतिविधियों पर भी चिंता जताई गई।

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