
नई दिल्ली। लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर सियासी संग्राम तय है। इसे लेकर भाजपा और कांग्रेस समेत तमाम पार्टियों ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी कर दिया है। व्हिप यानी वो सख्त आदेश, जिसे मानना सांसदों के लिए अनिवार्य होता है। अगर किसी ने इसे नजरअंदाज किया तो उसकी संसद सदस्यता तक खतरे में पड़ सकती है।
संसद में व्हिप एक लिखित आदेश होता है जिसे किसी पार्टी के सदस्यों को भेजा जाता है, ताकि वे किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर मतदान के दौरान मौजूद रहें और पार्टी के निर्देश के अनुसार वोट करें। इसे मानना पार्टी के सभी सदस्यों के लिए जरूरी होता है। हर पार्टी एक वरिष्ठ सदस्य को मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) नियुक्त करती है, जो यह सुनिश्चित करता है कि पार्टी के सभी सदस्य व्हिप का पालन करें। भारत में सभी राजनीतिक दल अपने सदस्यों को व्हिप जारी कर सकते हैं, जिससे संसद में पार्टी की एकता बनी रहती है।
व्हिप तीन प्रकार के होते हैं? वन लाइन व्हिप जिसमें सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश। टू लाइन व्हिप जिसमें मौजूद रहकर पार्टी लाइन के अनुसार वोटिंग करने का आदेश और तीसरा थ्री लाइन व्हिप, जो सबसे सख्त है इसमें पार्टी के खिलाफ जाने पर सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। विपक्षी इंडिया गठबंधन ने वक्फ संशोधन विधेयक का खुलकर विरोध करने की रणनीति बनाई है। उधर, भाजपा ने भी विधेयक को पारित कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। इसी के चलते दोनों पक्षों ने अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है।
अगर कोई सांसद व्हिप का उल्लंघन करता है तो पार्टी उसके खिलाफ सख्त कदम उठा सकती है। यह मामला दलबदल विरोधी कानून के दायरे में आता है, जिससे सांसद की सदस्यता रद्द हो सकती है। हालांकि, अगर किसी पार्टी के एक तिहाई सांसद एक साथ व्हिप तोड़ते हैं तो इसे पार्टी से अलग होने के संकेत के तौर पर देखा जाता है। व्हिप की परंपरा ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली से आई है। भारत समेत ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, और आयरलैंड जैसे देशों में भी इसका पालन किया जाता है। ब्रिटेन में यह एक सख्त संसदीय अनुशासन का हिस्सा है, जबकि कनाडा में इसे लिखित रूप में तैयार किया जाता है।