
नई दिल्ली। बांग्लादेश में अंतिरम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के बयान पर बवाल मच गया है। त्रिपुरा में सरकार और अपोजिशन पार्टियां एक साथ आकर केंद्र सरकार से गुजारिश कर रही हैं कि बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार के सलाहकार मुहम्मद यूनुस के बयान पर सख्त जवाब दिया जाए। यूनुस ने अपने चीन दौरे के दौरान कहा था कि नॉर्थ-ईस्ट भारता का एक लैंडलॉक्ड इलाका है और सिर्फ बांग्लादेश ही इसको समंदर तक पहुंच दे सकता है।
त्रिपुरा में बीजेपी के तर्जुमान नबेंदु भट्टाचार्य ने कहा कि हिंदुस्तान की सरकार मुल्क की सरहदों की हिफाजत के लिए कई कदम उठा रही है और बांग्लादेश में जो चल रहा है, उससे सब वाकिफ हैं। उन्होंने कहा कि यूनुस का बयान पूरी तरह से बेबुनियाद है। वहीं, अपोजिशन लीडर जितेंद्र चौधरी ने इसे बचकाना बयान करार देते हुए कहा कि समंदर तक पहुंच का मसला इंटरनेशनल कानूनों के तहत तय होता है, न कि किसी एक आदमी के फैसले से।
टीआईपीआरए मोथा के बानी प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने वीडियो जारी कर कहा, “यह बयान सीधे-सीधे नॉर्थ-ईस्ट को धमकाने की कोशिश है। वो चीन को बुला रहे हैं कि आओ, हमारे मुल्क में इन्वेस्ट करो। भारत की सरकार को अब सख्त कदम उठाने होंगे, वरना ये लोग हमें बार-बार धमकाते रहेंगे।” उन्होंने आगे सोशल मीडिया पर लिखा कि यूनुस का बयान हिंदुस्तान के ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर को कमजोर करने की कोशिश है, जो नॉर्थ-ईस्ट को बाकी मुल्क से जोड़ता है।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह समेत कई नॉर्थ-ईस्ट के लीडर्स ने यूनुस के बयान की कड़ी निंदा की। सरमा ने कहा, “बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार के सलाहकार का यह बयान उकसाने वाला और पूरी तरह नामंजूर करने लायक है। यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि चिकन नेक कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक रोड और रेलवे नेटवर्क पर काम किया जाना चाहिए। वहीं मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह ने भी बयान की निंदा करते हुए कहा कि यह हिंदुस्तान की अखंडता को चुनौती देने की कोशिश है, जिसे हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विपक्ष ने इस मसले पर मोदी सरकार की खामोशी पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस लीडर गौरव गोगोई ने कहा कि यह दुखद है कि भारत की फॉरेन पॉलिसी इतनी कमजोर हो गई है कि अब बांग्लादेश जैसा मुल्क भी खुलकर चीन के करीब जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस लीडर सुष्मिता देव ने यूनुस पर तंज कसते हुए कहा कि पहले उन्हें अपने ही मुल्क की सरहदों पर नजर डालनी चाहिए, क्योंकि बांग्लादेश खुद तीन तरफ से भारत से घिरा हुआ है।
प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने कहा कि अगर 1947 में चटगांव का पोर्ट भारत में रहता, तो आज ऐसी स्थिति ही नहीं आती। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “यूनुस खुद एक अस्थायी नेता हैं, वो ज्यादा दिन नहीं टिकेंगे। त्रिपुरा, चटगांव पोर्ट से ज्यादा दूर नहीं है, ये बात वो याद रखें।”