
मुंबई। वर्तमान में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और गिरावट का असर आईपीओ (Initial Public Offering) के मार्केट पर भी देखने को मिल रहा है। 2024 में जो कंपनियाँ लिस्ट हुईं, उनके शेयर 2025 में अपने इश्यू प्राइस से नीचे चले गए हैं, जिससे निवेशकों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।
शेयर बाजार की यह गिरावट न केवल निवेशकों को प्रभावित कर रही है, बल्कि आईपीओ के बाजार को भी मंदी का सामना करना पड़ रहा है। नए आईपीओ की संख्या में कमी देखी जा रही है, और ग्रे मार्केट में भी उतनी हलचल नहीं दिख रही, जितनी पहले हुआ करती थी।
उन कंपनियों की बात करें जिनके शेयर आईपीओ के प्राइस से नीचे गए हैं, तो वे आमतौर पर उन क्षेत्रों से आती हैं जहाँ अनिश्चितता या कमजोर वित्तीय प्रदर्शन हो सकता है। कुछ ऐसी कंपनियाँ, जिनकी लिस्टिंग में इश्यू प्राइस से नीचे गिरावट आई है, उनमें तकनीकी, मैन्युफैक्चरिंग, या उपभोक्ता-आधारित उद्योग की कंपनियाँ शामिल हो सकती हैं, जिन्हें निवेशकों ने सही तरह से नहीं अपनाया।