शनि करेंगे मीन राशि में गोचर

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि सबसे धीमा ग्रह माना जाता है। साथ ही शनि ग्रह का नाम लेते ही मन में डर उत्पन्न हो जाता है क्योंकि शनि को एक क्रूर ग्रह माना जाता है। साथ ही शनि की साढ़े साती और ढैया का प्रकोप इतना गंभीर माना जाता है कि जिस भी व्यक्ति की राशि पर शनि का प्रकोप चल रहा होता है, उसके बनते-बनते काम बिगड़ जाते हैं। शनि गोचर की बात करें, तो शनि को एक राशि में अपना एक चक्र पूरा करने में ढ़ाई साल का समय लगता है। शनि मेष से लेकर मीन तक 12 राशियों में ढ़ाई-ढ़ाई साल के लिए रहते हैं।

शनि का मीन राशि में गोचर भारतीय ज्योतिष में महत्वपूर्ण माना जाता है, और इसका प्रभाव विभिन्न तरह की घटनाओं पर पड़ सकता है। शनि का मीन राशि में गोचर विशेष रूप से भावनात्मक और मानसिक स्तर पर बदलाव लाने वाला हो सकता है। यह गोचर विशेषकर उन लोगों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जिनकी राशि या लग्न मीन या अन्य जल तत्त्व से संबंधित होती है।

शनि का मीन राशि में गोचर मानसिक दबाव, भ्रम, और असमंजस की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। इस दौरान लोग अपने लक्ष्यों के प्रति स्पष्ट नहीं हो सकते, जिससे अनिश्चितता की स्थिति बन सकती है। यह विनाशकारी हो सकता है, खासकर जब लोग मानसिक रूप से कमजोर होते हैं। शनि का मीन में गोचर आमतौर पर स्वास्थ्य पर भी असर डालता है। विशेष रूप से मानसिक और तंत्रिका तंत्र से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे अवसाद, चिंता, और अनिद्रा। रिश्तों में असहमति, परिवार में तनाव, और भावनात्मक उथल-पुथल के कारण व्यक्तिगत जीवन में कठिनाइयां आ सकती हैं। शनि का प्रभाव उन लोगों पर अधिक हो सकता है, जो पहले से ही संघर्ष का सामना कर रहे होते हैं।

शनि 29 मार्च 2025 को मीन राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र की भविष्यवाणी के अनुसार शनि जब भी मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तो काफी विनाशकारी घटनाएं घटती हैं। जैसे, 2025 में भी शनि के मीन राशि में जाने से कई विनाशकारी घटनाओं के घटने की आशंका जताई जा रही है। इन भविष्यवाणियों को इसलिए भी गंभीरता से लिया जा रहा है क्योंकि बीते समय में शनि ने जब भी मीन राशि में गोचर किया है, तो कई अनहोनी घटनाएं घटी हैं। 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि एक राशि में ढ़ाई साल तक रहते हैं। 1937 में जब शनि ने मीन राशि में प्रवेश किया था, तो दूसरे विश्वयुद्ध की स्थिति बनने लगी थी। विश्व के देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। विशेषकर चीन ने जापान पर हमला कर दिया था। इसके कारण दूसरे देशों के बीच भी तनाव की स्थिति बढ़ती चली गई। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि के प्रकोप से 1939 से 1945 के बीच दूसरा विश्वयुद्ध हुआ था।

भारत और पाकिस्तान का युद्ध 1965 में हुआ था। 17 दिनों तक चले इस युद्ध की स्थिति बहुत पहले ही बन गई थी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब शनि का गोचर मीन राशि में हुआ था, तो भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया। शनि के मीन राशि में गोचर के बाद जैसे-जैसे समय बीतने लगा। भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हो गया।

शनि के मीन राशि में गोचर के एक और विनाशकारी प्रभाव की बात करें, तो 17 जनवरी, 1995 को जापान में भीषण भूकंप आया था। इससे कोबे शहर और आसपास के इलाके बुरी तरह से प्रभावित हुए थे। इस भूकंप की तीव्रता 7.2 थी। इस भूकंप में 6,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे। वहीं, 30,000 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। यह इस सदी का सबसे भयंकर भूकंप भी माना जाता है।

Related Articles

Back to top button