
नई दिल्ली। 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जिन ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की बर्न्ट मेमोरी या माइक्रो-कंट्रोलर की जांच की मांग की गई थी, वे सभी मशीनें डायग्नोस्टिक टेस्ट में सफल पाई गई हैं और कहीं भी ईवीएम वोट और वीवीपैट पर्चियों में कोई अंतर नहीं मिला। यह जानकारी भारत निर्वाचन आयोग (EC) ने साझा की और कहा कि यह परीक्षण एक बार फिर साबित करता है कि ईवीएम पूरी तरह से सुरक्षित और छेड़छाड़ से मुक्त हैं।
महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को 8 उम्मीदवारों से आवेदन मिले थे, जिनमें इन 10 विधानसभा क्षेत्रों का उल्लेख था। वे विधानसभा क्षेत्र कोपरी-पाचपाखडी, ठाणे, पनवेल, अलीबाग, खडकवासला, अर्णी, येवला, चंदगड, कोल्हापुर उत्तर और माजलगांव शामिल है। इनमें से कुछ में हारने वाले प्रत्याशियों ने ईवीएम की बर्न्ट मेमोरी यानी कि माइक्रोचिप की जांच की मांग की थी।
कुल 48 बैलट यूनिट, 31 कंट्रोल यूनिट और 31 वीवीपैट यूनिट्स पर चेकिंग एंड वेरिफिकेशन प्रक्रिया की गई। 8 में से 6 उम्मीदवार और उनके प्रतिनिधि उपस्थित थे। 2 ने भाग नहीं लिया। जांच प्रक्रिया में निर्माता कंपनी ECIL के इंजीनियरों ने सभी मशीनों पर डायग्नोस्टिक टेस्ट किए और उन्हें सर्टिफाइड किया।
पनवेल, अलीबाग, अर्णी, येवला, चंदगड, कोल्हापुर उत्तर और माजलगांव में डायग्नोस्टिक टेस्ट के साथ मॉक पोल भी किया गया। EVM रिजल्ट को वीवीपैट की पर्चियों से मिलाया गया और कहीं भी कोई गड़बड़ी या अंतर नहीं पाया गया। चुनाव आयोग के प्रवक्ता ने कहा, “हर मशीन ने टेस्ट पास किया और VVPAT मिलान में कोई विसंगति नहीं पाई गई। इससे एक बार फिर साबित होता है कि भारत की ईवीएम प्रणाली पूर्णतः विश्वसनीय और छेड़छाड़ से मुक्त है।”
पिछले वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया था कि मतदाता सूची में मनमानी तरीके से नाम काटे और जोड़े गए। शाम 5 बजे के बाद अचानक मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई, जिससे बीजेपी को फायदा हुआ। हालांकि, चुनाव आयोग द्वारा कराई गई तकनीकी और भौतिक जांच से यह आरोप बेबुनियाद साबित हुए हैं।