
नई दिल्ली। दिल्ली भारत का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर है, और यह अक्सर वायु प्रदूषण के कारण सुर्खियों में रहता है। दिल्ली में हवा की गुणवत्ता खराब होने का मुख्य कारण वाहन प्रदूषण, निर्माण कार्य, कृषि में पराली जलाना, और औद्योगिक उत्सर्जन है।
यह स्थिति विशेष रूप से सर्दी के महीनों में और सर्दी में हवा की दिशा बदलने के कारण और भी गंभीर हो जाती है। सरकार और विभिन्न संगठन इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठा रहे हैं, लेकिन स्थिति अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।
‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) ने कहा कि जनवरी 2025 में दिल्ली में पीएम (हवा में मौजूद कण) 2.5 की औसत सांद्रता 165 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर दर्ज की गई। पीएम 10 स्तर अक्सर खतरनाक सीमा तक बढ़ जाते हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं।
इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ और शुक्रवार को यह ‘मध्यम’ श्रेणी में रही। दिल्ली में अधिकतम तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 156 दर्ज किया गया।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अधिकतम तापमान सामान्य रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी के अनुसार, दिन में आर्द्रता का स्तर 33 से 60 प्रतिशत के बीच रहा।