
बरेली। बरेली कोर्ट ने लोकसभा चुनाव के दौरान ‘जाति जनगणना’ और आर्थिक सर्वेक्षण संबंधी टिप्पणी पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता पंकज पाठक ने अदालत में कहा कि राहुल गांधी ने चुनाव के दौरान जातीय जनगणना पर जो बयान दिया, वह देश में गृहयुद्ध शुरू करने की कोशिश जैसा था।
पंकज पाठक के अनुसार, पहले उन्होंने इस मामले में मामला दर्ज कराया था, लेकिन एमपी-एमएलए कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद उन्होंने जिला जज कोर्ट में अपील की, जिसे स्वीकार कर लिया गया, और अब राहुल गांधी को नोटिस जारी किया गया है। नोटिस में राहुल गांधी को 7 जनवरी 2024 को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है। यह मामला राहुल गांधी के बयान को लेकर हो रही विवादों और उसके संभावित प्रभावों पर आधारित है।
कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद उदित राज ने बरेली कोर्ट द्वारा राहुल गांधी को जारी नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “बेकार नोटिस” बताया और कहा कि इस पर कोई चर्चा करने जैसी बात नहीं है। उन्होंने न्यायाधीशों की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें उनके पद से हटा देना चाहिए। उदित राज ने यह भी कहा कि राहुल गांधी ने “जितनी आबादी, उतना हक” के सिद्धांत का समर्थन करते हुए अपनी आवाज उठाई है और उनका बयान देश के गरीब और पिछड़े वर्गों के हक में था।
राहुल गांधी ने चुनावी रैली के दौरान जाति जनगणना की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा था कि सबसे पहले, हमें पिछड़ी जातियों, एससी, एसटी, अल्पसंख्यकों और अन्य जातियों की सटीक आबादी और स्थिति जानने के लिए जाति जनगणना करनी चाहिए। उनका यह बयान समाज के विभिन्न वर्गों के अधिकारों की पहचान करने और उनका हक सुनिश्चित करने की दिशा में था।