
कांग्रेस पार्टी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है। कांग्रेस के लिए आए दिन कई तरह की परेशानियां खड़ी हो रही है। गुरुवार चार अप्रैल को कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस नेता गौरव वल्लभ ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह कहते हुए पार्टी से इस्तीफा दिया कि वह सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकते हैं। इस वजह से पार्टी में बने रहना मुश्किल है।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए एक लिखा कि कांग्रेस पार्टी दिशाहीन होकर आगे बढ़ रही है। इस परिस्थिति में मैं खुद को पार्टी में सहज महसूस नहीं कर पा रहा हूं। मैं सनातन विरोधी नारे नहीं लगा सकता। इसलिए मैं कांग्रेस पार्टी के सभी पदों और सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं। अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि मैं काफी दुखी हूं और मन भी व्यथित है। मैं बहुत कुछ कहना और बताना चाहता हूं लेकिन मेरे संस्कार मुझे ऐसा करने से रोक रहे है। मैं अपने बातें आपके समक्ष रख रहा हूं ताकि मैं कोई सच न छिपाऊं।
वल्लभ कई महीनों से पार्टी की ओर से टेलीविजन कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो रहे थे और लंबे समय से उनकी कोई प्रेस वार्ता भी नहीं हुई थी। उन्होंने त्यागपत्र में कहा, ‘‘जब मैं कांग्रेस में शामिल हुआ था तो मेरा यह मानना था कि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी पार्टी है जिसमें युवाओं और बौद्धिक लोगों की तथा उनके विचारों की कद्र होती है। लेकिन पिछले कुछ समय से महसूस हुआ की पार्टी का मौजूदा स्वरूप नए विचार वाले युवाओं के साथ सामंजस्य नहीं बैठ पा रहा है।
बल्लभ ने दावा किया कि कांग्रेस जमीन से पूरी तरह कट चुकी है और वह नए भारत की आकांक्षा को नहीं समझ पा रही है जिसके कारण पार्टी न तो सत्ता में आ पा रही है और न ही मजबूत विपक्ष की भूमिका निभा पा रही है। वल्लभ का कहना है कि पार्टी ने अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम से दूर रहने का जो रुख अपनाया उससे वह क्षुब्ध हुए।
उन्होंने इस्तीफे में कहा, ‘‘मैं जन्म से हिंदू और कर्म से शिक्षक हूं। पार्टी के इस रुख ने मुझे हमेशा क्षुब्ध और परेशान किया। पार्टी व (इंडिया) गठबंधन से जुड़े कई लोग सनातन धर्म के खिलाफ बोलते हैं और उस पर पार्टी का चुप रहना, उसे एक तरह से मौन स्वीकृति देने जैसा है।’’ उन्होंने जाति जनगणना के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा है कि पार्टी इस संदर्भ में भी गलत दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘एक तरफ हम जाति जनगणना की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ संपूर्ण हिंदू समाज के विरोधी नजर आ रहे हैं। यही कार्य शैली जनता के बीच यह भ्रामक संदेश दे रही है कि पार्टी एक खास धर्म की हिमायती है। यह कांग्रेस के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है।’’ वल्लभ ने त्यागपत्र में यह दावा भी किया कि वर्तमान में आर्थिक मामलों पर कांग्रेस का रुख हमेशा वेल्थ क्रिएटर्स को नीचा दिखाने वाला रहा है तथा देश में होने वाले हर विनिवेश पर पार्टी का नजरिया नकारात्मक रहा है। उनका कहना है कि आर्थिक मुद्दों पर पार्टी के रुख को लेकर भी वह घुटन महसूस कर रहे थे।