राजनीति का सूर्यग्रहण

धर्मेंद्र प्रताप सिंह

समाजवादी पार्टी के विधायक अमिताभ बाजपेई अक्सर किसी न किसी कारण चर्चा में बने ही रहते हैं। वह कभी बीच सड़क पर धरने पर बैठ जाते हैं तो कभी पुलिस अधिकारियों से ही उलझ जाते हैं तो कभी ललकारने लगते हैं। कानपुर में ईद के दिन आचार संहिता उल्लंघन के आरोप में पुलिस सपा नेता विकास यादव को हिरासत में लेकर पनकी थाने ले गई। इस बात पर समर्थकों की भीड़ के साथ विधायक भी पनकी थाने पहुंचे और जमकर हंगामा किया। इस दौरान उन्होंने एसीपी को खुला चैलेंज तक दे डाला कि औकात हो तो रामनवमी पर ऐसा करके दिखाना, फिर हम आपकी हैसियत देखेंगे। जानकारी के मुताबिक अर्मापुर ईदगाह पर सुबह नमाज के दौरान सपा नेता विकास द्वारा पानी का स्टॉल लगाया गया था। स्टॉल पर एक राजनीतिक बैनर भी लगाया गया था। जैसे ही पुलिस को इसकी जानकारी हुई तो पुलिस ने बैनर को हटवा दिया तो विकास से तू-तू, मैं-मैं होने लगी। इसके बाद आक्रोशित विकास ने हंगामा शुरू कर दिया व सड़क पर नमाज पढ़ने के लिए भड़काने लगे, जिसके बाद पुलिस यादव को हिरासत में लेकर थाने ले आई थी। पुलिस का कहना था कि यदि उसके भड़काने पर लोग सड़क पर नमाज पढ़ने लगते तो ईद के दिन ही दंगा हो सकता था। यानी कि विकास ने अपनी ओर से आग लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। भले ही किसी पक्ष से किसी का भी भी कितना भी बड़ा नुकसान हो जाता। उसे तो पार्टी अध्यक्ष की नजर में अपनी नेतागिरी चमकाने की फिक्र थी। वह सिर्फ अखिलेश यादव की नजर में आने के लिए ऐसा कर रहा था।

नतीजे भते ही से ही कुछ भी होते। बाद में लोग पुलिस की ही तारीफ करते नजर आए थे। किसी तरह त्योहार के दिन शांतिपूर्वक समस्या का समाधान कर दिया था। यह दीगर बात है कि जैसे ही इस बात की जानकारी सपा वियापक और कानपुर से कांग्रेस के लोकसभा प्रत्यारी आलोक मिश्रा को हुई तो उनके साथ सैकड़ों समर्थक पनकी थाने पहुंच गए और हंगामा करने लगे थे। आपसी होठ में अमिताभ वाजपेई बहस में सीमाएं लांबते नजर आए थे, जबकि एसीपी पनकी टीची सिंह का कहना था कि कानून एवं व्यवस्था की स्थापना के लिए ही पुलिस होती है और इसके लिए पुलिस उस सीमा तक जाएगी, जो कि हालात के मड्ड्रेनजर जरूरी होगी। दोनों के बीच नोक-झोंक कुछ इस कदर बढ़ गई कि सपा विधायक एसीपी को धमकी देने लगे थे। विधायक ने कहा कि आप चर्म के आधार पर भेदभाव करेंगे। उसका अपराध इतना है कि वह सपा का नेता है और झंडे के अधार पर उसे अपराधी बनाकर पेश कर रहे हैं। अगर उसको गिरफ्तार करेंगे तो हमें भी करो। इस पर एसीपी उन्हें आश्वस्त करने की कोशिश करते दिखे कि वह हुजूम को सड़क पर ही नमाज अता करने के लिए भड़का कर गुमराह कर रहा था। लोग उसकी नेतागिरी की मंशा को समझ गए और समझझरी से काम लिव्या, वरना दंगा भी भड़क सकता था। ऐसे ही एक और मामले में वह धाने में ही चरने पर बैठ गए थे और थानाध्यक्ष के कहने लगे कि मुझे लाठी से मरवाओं और जितनी गुंडई करनी हो करो। इस दौरान धानाध्यक्ष बार-बार विधायक से धरने से उचने की विनती करते नजर आ रहे थे। दरअसल फजलगंज थाना पुलिस ने एक युक्फ को क्षेत्र में नशेबाजी एवं अराजकता करने के आरोप में पकड़ा था। पुलित्त से उसे थाने लेकर पहुंची और लॉकअप में बंद कर दिया। साथ ही धारा 151 के तहत उत्तका बालान भी कर दिया। पुलिस की इस कार्रवाई की जानकारी मिलते डी बाजपेई फजलगंज थाने पहुंच गए। पहले तो उन्होंने पुलिस से युक्क को लॉकअप में बंद करने का कारण पूष्ठा, फिर छोड़ने को कहा और जब ऐसा करने से थानाध्यक्ष ने गनाकर दिया तो नाराज होकर सपा विधायक थाने में ही जगीन पर धरने पर बैठ गए। विधायक की थाने के अंदर भरने पर बैठा देख पुतिस सकते में आ गई, क्योंकि जानकारी के फैलते ही मीडिया वाले भी पहुंचने लगे थे। देखते ही देखते विधायक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा तो भीड़ और बढ़ने लगी। ऐसे में यह उत्साह से भर उठे और थाने से टस से मस होने का नाम ही नहीं ले रहे थे। बाजपेई ने थानाध्यक्ष और अन्य पुलिस वालों की मौजूदगी में कहा कि मुझ पर चाहे जितनी लाठी बरसाओ, जब तक उस निर्दोष युवक को छोड़ा नहीं जाएगा, तब तक थाने से जाऊंगा नहीं। तुम लोग गुंडई कर रहे हो ती करो और जी भर कर करो। इस पर पुलिस के अधिकारी भी पहुंचने शुरू हो गए और फिर बड़ी मुश्किल से मामला मैनेज हो पाया था। इस बारे में वानाध्यक्ष ने पूरी बात बताई व कहा था कि विधायक एक अराजकतत्व को छुड़ाने आए थे, जो कि क्षेत्र में नशेबाजी एवं अराजकता फैला रहा था और लोगों की शिकायत मिलने पर उसे पकड़ा गया था और विधायक का कहना था कि बिना किसी व्ार्रवाई के युवक को छोड़ा जाए। इस दौरान सपा के पचासों समर्थक उत्साहवर्धन के लिए बाहर नारेबाजी करते रहे। प्रकरण के बारे में सपा नेताओं का कहना था कि सीसामऊ विधानसभा सीट पर उप चुनाव चल रहा है। इसी बीच दर्शन पुरवा के एक परिवार में गमी हो गई थी, जहां प्रत्याशी नसीम सोलंकी और विधायक समर्थकों के साथ जा रहे थे। इस दौरान बाजपेई ने एक आदमी से उस घर का रास्ता पूछा तो पुलिस ने थाने ले जाकर उस पर शांतिभंग की कार्रवाई कर दी। उसके बाद डीसीपी सेंट्रल दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि उप चुनाव के कारण आचार संहिता लागू है और भीड़-भाड़ के लिए अनुमति लेनी होती है। इसके बावजूद विधायक सैकड़ों लोगों को लेकर घूम रहे हैं और धाने में वरना लगा रहे हैं, जिसके कारण बाजपेई समेत करीब सया सी लोगों पर आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज किया गया है।

कम सजा के कारण बच गई विधायकी जाते-जाते

कानपुर में ही पैदा हुए अमिताभ ने कानपुर विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की और 1996 में बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की। उसके बाद राजनीति का रुख किया। समाजवादी पार्टी हो या कोई अन्य, सभी जातीय गुलदस्ते सजाते हैं। उन्हीं समीकरणों में फिट रहे हैं अमिताभ बाजपई, जिसके कारण सपा ने उन्हें युवा लोहिया वाहिनी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था। इसी दौरान 2012 में प्रदेश में सपा की सरकार बन गई तो बल्ले-बल्ले हो गई। 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में आर्य नगर से टिकट दिया गया। भाजपा के कथित बड़े नेता सलिल विश्नोई को मात देते हुए विधायक बने। 2022 में भाजपा के सुरेश अवस्थी को हराकर दोबारा जीत दर्ज की। लोकसभा चुनाव 2024 के पहले कमोबेश सभी दलों में भगदड़ मची थी तो अमिताभ के बारे मैं भी अफवाहों का बाजार गर्म था कि वह कांग्रेस में जा रहे हैं। इसी प्रकार की एक खबर कई चैनल पर भी चलाई जा रही थी। इस पर विधायक को वीडियो जारी कर सफाई देनी पड़ी थी कि यह मात्र अफवाह है, जो चुनाव के समय हमेशा से फैलाई जाती रही है। राजनीतिक स्तर पर उनका कोई भी निर्णय स्वतंत्र नहीं होगा। उनका जीना-मरना सपा के साथ है। कई चैनल कांग्रेस में शामिल होने के संबंध में खबर सूत्रों के हवाले से चला रहे हैं, जो पूरी तरह गलत है। मैं समाजवादी पार्टी में था, हूं और रहूंगा। मेरे नेता अखिलेश यादव हैं। वह पार्टी के हर निर्णय के साथ हैं। मेरे राजनीतिक जीवन का निर्णय अखिलेश यादव लेंगे। उनके विरोधी मंशा जानने के लिए इस तरह की अफवाहें उड़ा रहे हैं। अफवाहों से दूर रहे और सुरक्षित रहें। एमपी-एमएलए कोर्ट ने एक दशक से अधिक पुराने मामले में आर्य नगर विधायक अमिताभ बाजपेई को एक साल की सजा सुनाई व 8600 रुपये का बेल बांड जमा कराया। दरअसल दो अक्टूबर 2011 को वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी के साथ उनका विवाद हो गया था। इस पर अधिकारी ने बिठूर थाने में रिपोर्ट वर्ज कराई थी। बीते दो नवंबर को अंतिम बहस के बाद निर्णय की तिथि नौ नवंबर तय की गई थी। विधायक सुबह 11:30 बजे कोर्ट भी पहुंचे थे, पर न्यायालय ने लंच के बाद अभियोजन और बचाव दोनों पक्षों को तलब किया। बाद में कार्य की अधिकता के चलते निर्णय टल गया था और 11 नवंबर की तारीख मुकर्रर की गई थी। 11 को कोर्ट ने विधायक को तलब कर दरवाजा बंद करके फैसला सुनाने की प्रक्रिया शुरू की। देर शाम कोर्ट ने विधायक को आई आईपीसी की चार धाराओं में दोषी पाया है और एक साल की सजा सुनाई। चूंकि सजा दो साल से कम थी तो विधायकी बच गई, वरना लेने के देने पड़ जाते। बता दें कि उस दिन वाणिज्य कर के असिस्टेंट कमिश्नर दिनेश पाल जीटी रोड पर मंथना के पास वाहनों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान टीम ने एक पिकअप वाहन को रोका। चालक ने किसी को फोन किया, जिसके बाद अमिताभ समेत 40-50 लोग पहुंचे और टीम को घेर लिया था। इस मामले में सरकारी कार्य में बाधा डालने, सरकारी कर्मियों के साथ मारपीट करने, बलवा और एससी-एसटी एक्ट के तहत बिठूर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

ऐसे हैं हमारे सपा विधायक अमिताभ बाजपेई

चुनाव जीतकर विधायक बनने के लिए लोग क्या-क्या नहीं करते हैं, जो कतई नहीं करना चाहिए, वह भी कर जाते हैं। बात 2022 के चुनाव की है। कानपुर के आर्य नगर से समाजवादी पार्टी के टिकट पर अमिताभ बाजपेई चुनाव लड़ रहे थे। प्रचार के दौरान वह सीमा के साथ मर्यादा भी लांच गए। रोड शो के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ के वरवों पर कटाक्ष करने के दौरान बेशमी और मूर्खता की हद पार कर गए और रामायण के सुंदर कांड की व्याख्या करते हुए बोले थे कि आज ही मेरी वैवाहिक सिल्वर जुबली है तो घर पर सुंदर कांड का पाठ रखा तो मित्र बोलने लगे कि सुंदर कांड क्यों करवाया, कहीं घूमने-फिरने चले जाते? इस पर उन्होंने कहा कि मेरी पत्नी सुंदर है और मैं कांड करता रखता हूं इसलिए सुंदर कांड करवाया। वह इतने पर ही नहीं रुके और सामने खड़े लोगों से कहा कि आप की पत्नी भी तो काफी सुंदर हैं। आप सब लोगों ने तो मेरी पत्नी को देखा है, वह काफी सुंदर है। आजकल तो घर-घर जा रही हैं, जिसने नहीं देखा है तो देख लेना, पर कुछ ऐसा-पैसा मत कर देना, नहीं तो मैं कांड कर दूंगा। सियासत में एक से बढ़कर एक नमूने देखने को मिलते हैं और एक से एक घटिया बयान, पर यह भी कुछ कम घटिया नहीं था। मामला चुनाव का न होता और यदि यही किसी आम आदमी ने अपनी पत्नी के बारे में कहा होता तो उसका डुक्कर-पानी बंद हो जाता और उसी दिन उसकी पत्नी उसकी औकात उसके हाथ पर रख देती, पर ‘समरध को नहिं दोष गोसाईं’। इसे ही करते हैं कि हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम, वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती। कुछ ज्यादा उत्साहित भी थे, क्योंकि बालीवुड अभिनेत्री अमीषा पटेल उनके समर्थन में नुक्कड़ सभाएं कर रही थी। कहो न प्यार है, के गाने की लाइन-दिल मेरा हर बार ये सुनने को बेताब है कहो न अमिताभ बाजपेई से प्यार है, सुनकर बावले हुए जा रहे थे। मंच पर पहुंचते ही कहा, हेलो फ्रेंड्स आपकी सकीना बानी आ गई है तो युवा बावले हो गए। उनके साथ अमिताभ की पत्नी वंदना बाजपेई भी मौजूद थी।

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