

हिमाचल प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षा के लिए 1997 में कांगड़ा जाना हुआ, जहां से कुछ किमी दूर प्रकृति की गोद में बसे पालमपुर स्थित थलसेना के होल्टा कैंप में सगे संबंधी की पोस्टिंग के कारण रुकने का मौका मिला। रोज रात को सोने के पहले नौ बजे खाने की मेज पर आंतरिक कोड दे दिया जाता था। आतंकवाद के नजरिये से बहुत डिस्टर्बेस का दौर तो नहीं था, फिर भी सेना सुरक्षा के दृष्टिकोण से रोज ही ऐसा करती थी और देशभर में आज भी किया जाता होगा। मतलब कि यदि रात में कैंप के अंदर वाले संतरी के पूछने पर कोड बताएंगे तो जान के लाले नहीं पड़ेंगे, लेकिन अगर बाहरी कैंप में दिखा और कोड नहीं बता पाया तो सीधे फायर। कोडवर्ड का इस्तेमाल जहां रोज सैनिक राष्ट्रहित में जान-माल की क्षति से बचने के लिए करते हैं, वहीं घूसखोर सरकारी कर्मचारी-अधिकारी खानदानी पैदाइशी गरीबी दूर करने के लिए स्वहित में करते हैं। यही काम करते हुए जहां बीते पखवाड़े देश में दर्जनों आतंकी पकड़े गए हैं, वहीं परिवहन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी। इस बार एक ऐसा उल्लू पकड़ा गया था, जो कि बिहार से आया था किसी के बुलावे पर एवं अब वह भी कई डंपर का मालिक बन गया बताया जाता है।
नए उल्लू के बारे में खबरों में कहा गया है कि मूलरूप से सीतापुर का अभिनव सालभर पहले 12 साल पुरानी बाइक से आया था और 12 माह में ही नई कार से चलने लगा है। यह है उल्लू की कमाई का हाल तो विभाग के अधिकारियों की नामी-बेनामी संपत्ति देश के कोने-कोने से लेकर विदेश तक भी हो सकती है। स्पष्ट कर दूं कि बेरोजगार व नशेड़ियों की बहुतायत वाला यह वह गैंग है, जो अधिकारियों की कृपा से मातहत की तरह मार्ग अवरोधक के वाले स्थान या गंगा पुलों के पहला या बाद में सड़क किनारे कुर्सी डालकर अंधेरे में टॉर्च लेकर बैठता है और रातभर जागकर ट्रकों पर लिखे नाम गिनकर नोट करता रहता है। यह स्थान राज्य व नेशनल हाईवे स्थित पुलिस चौकियों के पास भी हो सकता है। 15 माह पहले जो खुलासा दृष्टांत मीडिया हाउस ने किया था, उसी का पुनर्रहस्योद्घाटन अभी 15 दिन पहले लखनऊ व कानपुर की स्पेशल टास्क फोर्स ने किया है। कार्रवाई में ओवरलोड ट्रकों को पास कराने में चोर-चोर मौसेरे भाई की तर्ज पर खनिज और एआरटीओ विभाग की मिलीभगत पकड़ी गई है। जांच में सामने आया है कि हर माह करीब डेढ़ करोड़ रुपये की वसूली सिर्फ बांदा-प्रयागराज कानपुर हाईवे पर हो रही थी। बाकी उन्नाव-लखनऊ कानपुर-हमीरपुर का काला चिट्ठा अलग से है। ये वही बेशर्म लोग थे, जो मीडिया और ट्रांसपोर्टरों के सवालों पर कहते रहे हैं कि क्या करें ऊपर तक पैसा भेजना होता है? फतेहपुर के थरियांव के खनन अधिकारी, उसके गनर, एआरटीओ का चालक और लोकेटर समेत छह के खिलाफ भ्रष्टाचार और खनिज अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई है। अभी तक कोई बड़ी मछली हाथ नहीं लगी है, पर एसटीएफ के मुताबिक छुटभैये मिलाकर फतेहपुर व उन्नाव में छह लोकेटर (उल्लू) समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जैसे उल्लू गैंग के गुर्गे व डंपर चालक आदि। छोटों की कीमत पर बड़ों पर हाथ न डाला जाए, इसी जुगत में अधिकारी राजधानी में उन लोगों की चरण वंदना कर रहे हैं, जिनके नाम पर वसूली का ठेका चला रहे थे। विभाग के बड़े अधिकारियों की कारस्तानी व ओवरलोडिंग के कारनामों के दस्तावेज एसटीएफ के हाथ लगे हैं। एसटीएफ ने लखनऊ के मड़ियांव थाने में एआरटीओ प्रवर्तन राजीव कुमार बंसल सहित कई अधिकारियों व कर्मियों को नामजद कराया है। एसटीएफ व पुलिस गोरखधंधे से जुड़े और आरोपियों की तलाश में लगी है और सभी छोटे-बड़े व पतले-मोटे से पूछताछ हो रही है। बीते दिनों ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ में भी अधिकारियों कर्मियों से छापा मार पूछताछ हुई थी। एसटीएफ की कार्रवाई से बचने के लिए दर्जनों अधिकारियों ने राजधानी में डेरा जमा रखा है तो कई को मंत्री व अन्य बड़े अधिकारियों की परिक्रमा लगाते हुए भी देखा गया है, जबकि बड़े खुद भयभीत हैं कि जांच की आंच कहीं उन तक न पहुंच जाए। दशकों से सभी को पता है कि यह सिंडीकेट प्रदेश भर में फैला हुआ है। सूत्र बताते हैं कि हाल के साल में रिटायर हो चुके कई अधिकारी अब भी सिंडीकेट छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं और जुड़े रहने के लिए हर शर्त मानने को तैयार हैं। इनमें लखनऊ में तैनात रहे कई अफसर बताए जाते हैं। बहती गंगा में हाथ धोने के लिए ऑटो लोडर संयुक्त कल्याण समिति ने पुरानी शिकायतों का पुलिंदा निकाल लिया है। आगे भेजी गई शिकायतों में कहा गया था कि मंथली वसूली नहीं देने पर जान-बूझ कर चालाना काटते रहे हैं। अहम है कि दर्जनों नंबर सर्विलांस पर डाले गए हैं। प्रवर्तन से जुड़े दर्जनों नए-पुराने अधिकारियों ने नंबर बंद कर रखे हैं, जिनके खुले भी हैं वे व्हॉट्सएप कॉल पर बात करने के लिए मुश्किल से तैयार हो रहे हैं तो खबर है कि कई नए नंबर लेकर बात कर रहे हैं। एसटीएफ के इंस्पेक्टर दीपक सिंह ने एफआईआर में बताया कि कई जिलों में परिवहन और खनन अधिकारियों की मिलीभगत से राजस्व को भारी क्षति की सूचनाएं मिली थीं। थरियांव के सीओ वीर सिंह ने बताया कि लोकेटर धीरेंद्र सिंह व अभिनव, ट्रक चालक विक्रम, एआरटीओ का चालक बबलू पटेल, खनन अधिकारी देशराज पटेल, उसके सरकारी गनर राजू और एक अन्य को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्नाव कोतवाली के मोहल्ला हिरन नगर नियासी नियाज अहमद उर्फ अमन, तारिक हुसैन, कानपुर के घाटमपुर कोतवाली के जवाहर नगर निवासी सुनील सचान, ललईपुर का प्रदीप सिंह और हमीरपुर के मौदहा का निवासी श्रीकृष्ण भी पकड़ा गया है। कोतवाल संजीव कुशवाहा ने बताया कि एसटीएफ के उप निरीक्षक राहुल परमार की तहरीर पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर इनको जेल भेजा गया है। सभी के फोन में ऑनलाइन लेन-देन का ब्योरा भी मिल गया है। जांच की आंच प्रयागराज, फतेहपुर, कानपुर, उन्नाव होते हुए लखनऊ तक पहुंच चुकी है और बराबर गिरफ्तारी भी हो रही हैं। गौरतलब है कि परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीमों की जिम्मेदारी सड़कों पर आवेरलोड ट्रकों, बसों व अन्य वाहनों पर कार्रवाई करने की है, जिसे सही से नहीं निभाया जा रहा है। इसके पीछे अफसरों की अपनी दलील है कि स्टाफ की कमी है और वाहनों की बंद करने के लिए यार्ड की भी व्यवस्था नहीं है। सूत्र बताते हैं कि लखनऊ में कानपुर, सीतापुर, अयोध्या, सुल्तानपुर हरदोई रूट से रोजाना साने-जाने वाले ओवरलोड वाहनों की संख्या 1500 के आस-पास है। इस हिसाब से एक महीने में 45 हजार से अधिक वाहन लखनऊ के रास्ते गुजर गए, पर विभाग के अधिकारियों को नहीं दिखे। यह हाल तब है, जब लखनऊ में ही चार एआरटीओ के पद हैं। हालांकि अभी तीन खाली बताए जाते हैं। इसके अलावा चार पीटीओ (यात्री कर अधिकारी) हैं। प्रवर्तन दल के स्टाफ में 15 सिपाही हैं, पांच सुपरवाइजर व पांच ड्राइवर होने चाहिए, लेकिन इनकी संख्या क्रमशः तीन, एक व एक ही है। इसी तरह लखनऊ से सटे सभी हाईवे पर यार्ड होना चाहिए, लेकिन अभी सिर्फ आशियाना की पी-4 पार्किंग ही है। ज्ञात हो कि हमीरपुर, महोबा और जालौन आदि जिलों से मौरंग, गिट्टी व स्टोन डस्ट की सप्लाई कम से कम एक-तिहाई प्रदेश को होती है। बिना रॉयल्टी और जीएसटी बिल परिवहन और दोगुना माल लादकर चलने वाले ओवरलोड ट्रकों और डंपरों के जरिये कई सरकारी विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत से लाखों की राजस्व चोरी रोज हो रही थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी उच्चाधिकारी भी लपेटे में आएंगे। एआरटीओ कार्यालय में रोज की तरह रहने वाली गहमागहमी कम ही दिख रही है। अधिकारियों की कुर्सियां कई दिन से खाली हैं। कई अधिकारी यह कहते दिखे कि तीन दिन की ट्रेनिंग पर लखनऊ में हैं, जबकि कहते हैं कि वे सेटिंग-गेटिंग में लगे हैं। ईमानदारी से जांच हुई तो इस बार कई बड़े भी निपटेंगे। फंसने पर सभी हर अधिकारी का खुलकर नाम ले रहे हैं, पर इतना जरूर है कि हमाम में चूंकि सभी नंगे हैं इसलिए अधिकारी फंसने पर भी शायद ही बड़े अधिकारी व लखनऊ के अलंबरदारों का नाम लेने की हिम्मत जुटा सकें।
एआरटीओ-पीटीओ के चेले को रोज पहुंचाते थे 20 लाख
रायबरेली और उन्नाव के खनन अधिकारियों, एआरटीओ कार्यालय के कर्मचारियों समेत कुल 22 दलालों पर एफआईआर दर्ज की गई है। उन्नाव में पांच के अलावा रायबरेली और फतेहपुर से मौरंग कारोबार से जुड़े दो दलाल मोहित सिंह और सुशील भी पकड़े गए हैं। रायबरेली और फतेहपुर मार्ग पर चलने वाले करीब 114 ट्रकों से रोज वसूली होती थी। एसटीएफ की पूछताछ में दलालों ने फतेहपुर के एआरटीओ व पीटीओ स्टाफ, रायबरेली के एआरटीओ और उनके कर्मचारियों के नाम उगल दिए। अभी फतेहपुर में तैनात व उन्नाव में एआरटीओ रहे अंबुज सिंह ने वसूली के लिए परिवार के ही निर्भय सिंह को तैनात कर रखा था और बीते कई दशकों से यह कोई बहुत बड़ा रहस्योद्घाटन भी नहीं है। निजी कर्मी के तौर पर बेरोजगार भतीजों व साले आदि को वसूली के लिए लगाया जाता रहा है। इससे बड़ी बात यह है कि उन्नाव में एसटीएफ द्वारा संगठित गिरोह के पर्दाफाश के लिए चुना गया समय। पूरी कार्रवाई भोर में ढाई बजे की गई। गदनखेड़ा बाईपास पर छापे के दौरान पांच दलाल, बड़ी रकम, सात मोबाइल फोन, एक ट्रक और दो चमचमाती कारें बरामद की गई थीं। पूछताछ में उल्लू ने बताया कि एआरटीओ संजीव कुमार, सिपाही प्रदीप व रंजीत, एआरटीओ प्रतिभा गौतम के हमराही इंद्रजीत तथा पीटीओ सैफर किदवई के ड्राइवर सुरेंद्र को प्रति ट्रक 2500 रुपए प्रति रात देता है। एआरटीओ अंबुज सिंह के करीबी निर्भय को 11,000 रुपए प्रति ट्रक दिए जाते हैं। उल्लू गैंग के कारिंदे तारिक के मोबाइल में 350 ट्रकों की व्हॉट्सएप लिस्ट मिली, जिन पर कोई चालान नहीं होता था। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि संभाग के जिलों में ही 1500 ट्रकों व डंपर से एक करोड़ के आसपास का काम एक ही रात में हो जाता है। दूसरे उल्लू नियाज अहमद ने कूबूल किया कि वह दो साल से लगा है कि और प्रति ट्रक सात से 10 हजार ट्रक मालिकों से यूपीआई से लेता है और अफसरों तक पहुंचाता रहा है। आरोपियों ने बताया कि कानपुर के अफसरों के नाम पर हर महीने एक करोड़ रुपये जाते थे तो आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि लखनऊ हर माह कितने करोड़ जाते होंगे? लोकेशन देने में मदद करने वाले अफसरों के हमराहियों और चालकों को रोज 20.25 लाख जाते थे। इसके बाद भी उल्लुओं को रोज 6.75 लाख बचते थे।



