
नई दिल्ली। आरबीआई के कदम, अमेरिकी बाजार का रुख और बैंकों में पैसे की बढ़ती उपलब्धता ने बॉन्ड यील्ड को नीचे धकेल दिया है। आरबीआई ने अप्रैल में 80,000 करोड़ रुपये के बॉन्ड खरीदने की घोषणा की। इसके बाद भारत का 10 साल का बॉन्ड यील्ड 6.49% पर आ गया। अब सबकी नजर 9 अप्रैल को RBI के फैसले पर है। अगर RBI रेट कम करता है तो बॉन्ड यील्ड और गिर सकता है। अमेरिका और दूसरे वैश्विक हालात भी भारतीय बॉन्ड मार्केट को प्रभावित करेंगे।
RBI ने अप्रैल में ₹80,000 करोड़ के बॉन्ड खरीदने का ऐलान किया। जब RBI बॉन्ड खरीदता है, तो उनकी कीमत बढ़ती है और यील्ड यानी मुनाफा अपने आप गिर जाता है। यह कदम बैंकिंग सिस्टम में पैसा बढ़ाने के लिए उठाया गया था। अमेरिका में 10 साल के बॉन्ड का यील्ड 4.12% तक गिर गया, क्योंकि निवेशक डोनाल्ड ट्रम्प के नए टैरिफ के ऐलान से पहले सुरक्षित निवेश की ओर भागे। भारतीय बॉन्ड मार्केट अक्सर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का पीछा करता है, इसलिए यहां भी यील्ड गिरा।
RBI ने पिछले कुछ दिनों में बैंकिंग सिस्टम में ₹5.5 लाख करोड़ से ज्यादा पैसा डाला। तिमाही के दौरान अब तक आरबीआई ने ओएमओ खरीद, लंबी अवधि की वीआरआर नीलामी और विदेशी मुद्रा स्वैप के संयोजन के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में लगभग 5.5 लाख करोड़ रुपये की टिकाऊ लिक्विडिटी डाली है। टाटा म्यूचुअल फंड ने एक रिपोर्ट में कहा कि आगे चलकर लिक्विडिटी की स्थिति सकारात्मक रहने की उम्मीद है। बता दें बैंकों के पास ज्यादा पैसा होता है, तो वे बॉन्ड की तरफ कम भागते हैं, जिससे यील्ड कम हो जाता है।
बॉन्ड यील्ड वह रिटर्न है, जो निवेशक मैच्योरिटी तक पाने की उम्मीद कर सकता है। जब बॉन्ड यील्ड गिरता है, तो बॉन्ड की कीमतें बढ़ जाती हैं। हालांकि बॉन्ड यील्ड में गिरावट आम तौर पर यह संकेत देती है कि बाजार भविष्य में कम ब्याज दरों की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में गिरावट आए।
बाजार को उम्मीद है कि आरबीआई 9 अप्रैल को अपनी मीटिंग में रेपो रेट (कर्ज की दर) 0.25% से 0.50% तक काट सकता है। क्योंकि, फरवरी महीने में सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति 3.61 प्रतिशत के स्तर पर रही। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए इसी मुद्रास्फीति क्रमशः 4.64 प्रतिशत और 3.87 प्रतिशत है। WPI फूड इंडेक्स पर आधारित मुद्रास्फीति की दर जनवरी 2025 में 5.97 प्रतिशत से घटकर फरवरी 2025 में 3.75 प्रतिशत हो गई। यानी महंगाई (फरवरी में 3.61%) RBI के टार्गेट (4%) से नीचे है, इसलिए रेट कट होने की प्रबल संभावना है।