
मैनपुरी। 44 साल पहले हुए नरसंहार के एक मामले में अदालत ने आज अपना फैसला सुना दिया है। इस पूरे मामले में दोषी 17 लोगों में से 14 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि आज अदालत ने मामले में जिंदा बचे तीन आरोपियों को भी फांसी की सजा सुना दी है। मैनपुरी कोर्ट ने आज रामसेवक, कप्तान सिंह, रामपाल को फांसी की सजा सुना दी है।
आज से ठीक 44 साल पहले की ये घटना है। तारीख थी 18 नवंबर, 1981 की। मैनपुरी के जसराना थाना का दिहुली गांव। अचानक राधे-संतोषा डकैत गैंग का गांव में आना होता है। पहले दलितों को घर से बाहर निकाला जाता है और फिर उनपर गोलियों की बौछार की जाती है। देखते हीं देखते 24 दलितों को मौत की नींद सुला दिया जाता है। गांव के दलितों पर पुलिस से मुखबिरी करने की आशंका में डकैतों ने इस नरसंहार को अंजाम दिया था। दिहुली नरसंहार उस वक्त का इतना बड़ा घटनाक्रम था कि देश की प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी भी घटना स्थल पर पहुंची थीं। दिहुली गांव के इस नरसंहार ने उस वक्त पूरे देश को दहला कर रख दिया था।
आज आखिरकार इस मामले पर मैनपुरी की अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। 44 साल बाद आये इस फैसले के पहले हीं गैंग के 17 आरोपियों में से 14 आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि शेष बचे 3 आरोपियों को अदालत ने फांसी की सजा सुना दी है। अदालत ने इस मामले में आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।