क्षणे रुष्टा और क्षणे तुष्टा

टी. धर्मेंद्र प्रताप सिंह

गाय और बेटियों की सुरक्षा के नाम पर अपनी ही सरकार को इधर एक-दो साल से कठघरे में प्रायः खड़े करने वाले लोनी (गाजियाबाद) के विधायक नंद किशोर गुर्जर ने लिस्ट में एक और बिंदु जोड़ा है महाकुंभ का। उनके सियासी आलोचकों का कहना है कि मंत्री नहीं बनाए जाने के बाद से ही वह नाराज हैं और उक्त सूची में हर माह एक बिंदु जोड़ने के प्रयास में लगे रहते हैं। इसी विषय पर उनका शोध निरंतर जारी रहता है।

कभी हत्या की साजिश की बात करने लगते हैं तो कभी विधायकों के अपमान की बात करके सीधे सीएम हाउस पर शाब्दिक हमला करते हैं तो कभी सूबे की कानून व व्यवस्था पर। कभी खुद की हत्या की साजिश की बात करने लगते हैं तो कभी भ्रष्टाचार की। कभी रोहिंग्या की तो कभी बांग्लादेशी घुसपैठियों की। एक बार लोनी के साप्ताहिक बाजार के सब्जी विक्रेताओं के भी मुद्दे पर विरोध स्वरूप सड़क किनारे बैठकर सब्जी बेच चुके हैं। तैश में यहां तक बोल गए कि सरकार अपनी न होती तो सीएम हाउस में भूसा भरवा देता। इसका निहितार्थ यही है कि किसी पॉवर हाउस से सीधे जुड़े हैं। इस बयान को क्यों न सीधे सीएम को चुनौती माना जाए? उनके बयानों की समीक्षा करें तो उनका हाल क्षणे रुष्टा और क्षणे तुष्टा वाला लगता है। उन्हें लगता है कि जब कुछ ज्यादा बोल गए हैं तो अगले दिन मैनेज करने की कोशिश में जुटे नजर आते हैं।

दूसरे यह भी तय है कि लखनऊ और दिल्ली में कम से कम एक एक सॉकेट ऐसा है, जहां प्लग सीधे जुड़ा है और एनर्जी दे रहा है। जानकार कहते हैं कि उन्हें दोनों जगह से पावर सप्लाई मिल रही है। दिल्ली में तार कहां जुड़ा है, यह बताना जल्दबाजी होगी, पर अक्सर भौगोलिक व मानसिक नजदीकी के कारण वह दिल्ली दरबार में ही पाए जाते हैं। सीएम के दावों को उनके ही विधायक द्वारा सिरे से खारिज करना कई लोगों के सिर के ऊपर से निकल जाता है।

सत्ता के गलियारों में प्रायः इसके सियासी मायने ढूंढ़े जाने लगते हैं। काफी संभव है कि कुछ असंतुष्ट विधायक भी उन्हें शह दे रहे हों, पर यह कहकर गुट से जुड़े होने की बात खुद ही उन्होंने साफ कर दी कि लोकतंत्र में कुछ लोग दुर्योधन बनकर केशव को घेरने में लगे हैं। केशव को अगर लोग बांधने चले तो सब निपट जाएंगे। जैसे भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य निपट गए थे। वह यहीं नहीं रुके, बल्कि कहा कि केशव तो केशव जी हैं, उनकी ही लीडरशिप में 325 सीटें आई थीं।

उक्त कारण से ही उन्हें केशव खेमे का माना जाता है। तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने ही पार्टी की टिकट दिलाई थी और इस छात्रनेता ने 40000 से अधिक मतों से बीएसपी के मौजूदा विधायक हाजी जाकिर अली को हराने में सफलता पाई थी। यूं तो अचानक ज्ञान किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकता है, पर ताजा ज्ञान को मंत्री पद से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ जानकार इसे सीएम की कुर्सी में फेरबदल से भी जोड़कर देख रहे थे। दोनों बार केशव ने अपने कोटे से मंत्री भी बनाने की कोशिश की, पर गुट स्पष्ट होने के कारण सफलता नहीं मिली।

मतलब आग अभी की नहीं, बल्कि पुरानी है, जो करीब सात साल से दिल में सुलग रही है। इसी कारण कई बार विधायक सीधे सीएम को चुनौती देते नजर आते हैं। सियासत के समझदारों के लिए इशारा ही काफी था, फिर भी बात को दूसरी दिशा में ले जाते हुए कहते हैं कि तहसील से थाने तक भ्रष्टाचारी बैठे हैं व सीएम कहते हैं सुबूत लाओ, तब कार्रवाई होगी। उन्होंने इन सबका सरगना प्रदेश का सबसे पावरफुल अधिकारी मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह को बताया। हमारा प्रोटोकॉल तो चीफ सेक्रेटरी से बड़ा है, पर उसी के कारण अधिकारी कहते हैं कि विधायक 300 टहल रहे हैं।

सीएम हाउस में भी इज्जत नहीं है। वह यहीं रुकते नहीं हैं, बल्कि योगी आदित्यनाथ के प्रदेश में कानून के राज के दावे पर कहते हैं कि जंगलराज है। कभी भी ये अधिकारी हत्या भी करा सकते हैं। सीएम दावा करते हैं कि उनकी सरकार में बहन-बेटियां सुरक्षित हैं और वे रात को भी घर से बाहर अकेली निकल सकती हैं, जिसे वह कोरा झूठ बताते हुए कहते हैं कि महिलाओं के साथ छेड़छाड़ हो रही है तो रोज दर्जनों बलात्कार भी। एंटी रोमियो स्क्वॉयड कहां है अब। गनचले व शोहदे छुट्टा पशुओं की तरह छुट्टा घूम रहे हैं।

सीएम को ललकारने के क्रम में अगले ही पल वह एनसीआर को बचाने की गुहार लगाते नजर आते हैं। वीडियो में कहते दिखते हैं कि गाजियाबाद पुलिस सपा एजेंट के रूप में काम कर रही है, जिसके कारण बांग्लादेशी व रोहिंग्या का आतंक कायम हो चुका है। वे स्थानीय मुसलमानों के साथ मिलकर लगातार दरिंदगी कर रहे हैं। दुराचार की रोज नई घटनाएं सामने आ रहीं हैं।

हाल की कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि लोनी के एक गांव में मुस्लिम लड़के ने हिंदू बनकर लड़की से शादी की, फिर उसे दूसरे मुसलमान को बेच दिया। थाना टीला मोड़ के तहत भी एक बेटी को बुरी तरह पीटा गया। मोदीनगर में भी एक बेटी को जबरन गाड़ी में खींचने की कोशिश की गई और उसके साथ भी मारपीट की गई, जिसके बाद से लोग भयभीत हैं। यह भी कहा था कि लव जिहाद के आरोपी के घर पर बुलडोजर नहीं चला तो वह खुद बुलडोजर लेकर निकल पड़ेंगे।

भले ही कानून को हाथ में लेने के आरोप में फांसी दे दी जाए। शाहीनबाग से लेकर लोनी तक बांग्लादेशी व रोहिंग्या ने जीना दूभर कर रखा है। वे चेन स्नेचिंग आदि की वारदात पर वारदात कर रहे हैं। हजारों रोहिंग्या को केजरीवाल ने लोनी में बसाकर वोट लेने के लिए आधार दिल्ली में बनवाए हैं। जुलाई 2024 में उन्होंने यह कहते हुए एक फीता काटा था कि सब भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। उनके जिले में पार्टी के महामंत्री की रिपोर्ट दर्ज नहीं हो रही है। वह ईंट से ईंट बजा देंगे। पुलिस ने जिले में लगने वाले दर्जनों साप्ताहिक बाजारों को बंद करने का तुगलकी फरमान जारी किया, जिसका जनहित में विधायक ने बुरा माना और विरोध में विधायक सड़क पर बैठकर सब्जी बेचने लगे थे।

वह भी विक्रेता की ही तरह क्रेता को रेट बता रहे थे। विधायक ने कहा था कि जिले की खराब कानून-व्यवस्था नहीं नजर आती है। गरीब इतनी महंगाई में किसी तरह अपने बच्चे पाल रहा है तो पुलिस के पेट में दर्द हो रहा है। देने के बजाय पुलिस एक लाख से अधिक लोगों के सामने रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर रही है। दिल्ली चुनाव में पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए पुलिस ने यह कदम उठाया है।

जानकारी लेने पर पुलिस ने कहा था कि साप्ताहिक बाजार के कारण मेडिकल इमरजेंसी आदि की स्थिति में दिक्कत होती है। इस पर विधायक ने कहा था कि जिलेभर के सब्जी वालों को कोई दूसरी जगह पुलिस आयुक्त क्यों नहीं दे देते। एक दिन सुबह थाना लोनी पहुंचकर विधायक ने आरोप लगाया कि अशोक विहार के निवासी खलील अहमद ने लड़की की शादी डेढ़ वर्ष पहले मुजफ्फरनगर में तय की थी। अधिक दहेज के लिए शादी टूट रही है। पुलिस ने लड़के पक्ष पर कार्रवाई के बजाय दरोगा ने लड़के पक्ष के साथ मिलकर लड़की के भाई का शांतिभंग में चालान कर दिया, जिससे वह पुलिस पर भड़क उठे।

गुर्जर ने कहा कि कुछ तो शर्म करो कि विधायक होने के बावजूद थाने आना पड़ रहा है। लड़की चाहे हिंदू की हो या मुस्लिम की, अगर किसी के साथ अन्याय होगा तो वह उसके साथ खड़े हैं। कुछ दिन पहले भी विधायक ने थाने पहुंचकर पुलिस को अल्टीमेटम दिया था कि भाजपा की महिला नेत्री से छेड़‌छाड़ करने वाले की अगर शाम तक गिरफ्तार नहीं हुई तो वह खुद एक्शन लेंगे। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट से जाकर मिले और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा था। इस तरह पुलिस और विधायक सालभर में दसियों बार आमने-सामने आ चुके हैं।

उन्होंने कहा कि सीएम के भेजे वायसराय दफ्तर में बैठे रहते हैं व वारदात पर वारदात हो रही हैं। कोर्ट में मारने की धमकी दी जाती है, फिर कैसे ठीक होगी कानून व व्यवस्था इसलिए गाजियाबाद कमिश्नरेट भंग कर पुरानी व्यवस्था लागू की जाए। पुलिस में भ्रष्टाचार चरम पर है। एक प्रेस कांफ्रेंस में बोले कि एसीपी कार्यालय में पैसे लेते वीडियो वायरल हुआ, क्या हुआ? कई विधायक मुख्यमंत्री से मिले तो मुख्यमंत्री ने तीन बार आश्वासन दिया कि वह पुलिस कमिश्नर को हटा देंगे, लेकिन क्या हुआ? वह कहते हैं कि सीएम के खिलाफ बोलने वाले नेता के बारे में कहा जाता है कि दिल्ली या यूपी के किसी अन्य नेता से अटैच है, लेकिन हमारे साथ ऐसा नहीं है।

गियर डाउन करते हुए कहते हैं कि मुख्यमंत्री तो अच्छे आदमी हैं, जबान के पक्के हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि नीचे के अधिकारी उनकी भी नहीं सुन रहे हैं। हमारी मजबूरी है, अगर हम जनता की बात नहीं करेंगे तो जमानत जब्त हो जाएगी। कुछ अधिकारी सपा-कांग्रेस से मिलकर वही कर रहे हैं, जो लोकसभा चुनाव में किया था। अगस्त 2024 में उन्होंने यह कहकर बखेड़ा खड़ा किया था कि योगी दरबार में एमएलए की हैसियत चपरासी जैसी है।

योगी को चुनौती दे रहा बीजेपी विधायक !

सरकारी मशीनरी को कठघरे में खड़ा करने के चलते कहते भी हैं कि राजनीति में जैसा दिखता है, असल में वैसा होता नहीं है। सारे काम बंद कर वह सरकार की बखिया उधेड़ने में जुटे रहते हैं। विधायक ने अधिकारियों को आईना दिखाते हुए कहा कि रोज हजारों गाय काटी जा रही हैं। पुलिस खा रही पैसा। हर नाका, थाना व चौकी सेट है। हर कोई कहने लगा है कि ऊपर तक जा रहा है पैसा। स्लॉटर हाउसों के पास है रिकार्ड कि कितना पैसा जाता है ब्यूरोक्रेट को और कितना डेमोक्रेट को?

इसके अलावा जो गाय सरकारी गोशाला पहुंच जाती है, वह दुर्व्यवस्था के कारण रोती है और जानती है कि अब कभी जिंदा नहीं लौटेगी। बिना अपहरण के ही हो रही है फिरौती। दिन-रात चल रही है वसूली। अचानक कम क्यों होता जा रहा है गोवंश? जमीन निगल रही है या आकाश। ज्ञात हो कि सरकार ने गोवध निवारण (संशोधन) विधेयक 2020 के जरिए गो हत्या कानून को सख्त बनाया था। अगस्त में विधेयक दोनों सदनों से पास कराकर 10 साल की सजा का प्रावधान किया गया था तो गोवंश को शारीरिक तौर पर नुकसान पहुंचाने पर एक से सात-सात तक की सजा थी, लेकिन विधायक सारे प्रावधानों को झूठा बताकर दावा करते हैं कि इस सरकार में प्रतिदिन 50 हजार गाय काटी जा रही हैं। सीएम कहते हैं कि यूपी में जीरो टॉलरेंस लागू है, पर विधायक कहते हैं लूट मची है चारों तरफ।

मुख्यमंत्री तक सारी बातें पहुंचनी चाहिए। एक अधिकारी है, जो खबरों को दबाता है, रोकता है और लुटेरों का मुखिया है। उन्होंने कहा कि हमारा कमिश्नर और चीफ सेक्रेटरी से बैर नहीं है। ना उनसे मिले हैं और ना ही ज्यादा बात करते हैं, पर बात-बात में उनका यह कहना कि चीफ सेक्रेटरी बैठे हैं। इस तरह तो हत्या करा देंगे। तैयारी पूरी है। 9 एमएम की 25 पिस्टल खरीदी जा चुकी हैं।

ज्ञात हो कि इससे पहले मंत्री आशीष पटेल ने अफसर और एसटीएफ पर हत्या कराने का आरोप लगाया था। पटेल ने कहा था कि पैर पर गोली मारने का अनुभव होगा। सीने पर गोली मारने की चुनौती देता हूं। हालांकि संदर्भ का खुलासा नहीं किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पटेल को अनावश्यक बयानबाजी से परहेज करने के लिए कहा है। महाकुंभ में भगदड़ के दौरान हुई मौतों को लेकर सरकार लगातार विपक्षी दलों के निशाने पर थी तो अंदर से भी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे थे। गुर्जर ने एक यूट्यूब चैनल से बातचीत में सीधे-सीधे कहा था कि कुंभ में हादसा नहीं हत्या हुई हैं। चीफ सेक्रेटरी पर रिपोर्ट दर्ज कराई जाए। दोषी अधिकारियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मुकदमा दर्ज हो। महाकुंभ में सैकड़ों करोड़ की लूट हुई है।

उन्होंने कहा कि चीफ सेक्रेटरी का ध्यान केवल लूट, गाय कटवाने और गरीबों की हत्या पर है। जिम्मेदारी लेते हुए उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। कहीं ज्यादा मौतों के सवाल पर कहा था कि असली गिद्ध यही अधिकारी हैं। ध्यान होगा कि विधानसभा से लेकर संसद तक इस मुद्दे पर विपक्ष ने कितना हो-हल्ला किया था।

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